कानून, अपराध और आज का फैसला—झारखंड में बहस जारी.

क्या बदलेगा यह फैसला राज्य की अपराध नीति

रांची : झारखंड हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून की व्याख्या को स्पष्ट कर दिया है. राज्य में बढ़ते संगठित अपराध के बीच यह फैसला प्रशासन की कार्यप्रणाली को मजबूत करने वाला माना जा रहा है. अदालत ने दो टूक कहा है कि एक्सटेंशन के लिए बार-बार एडवाइजरी बोर्ड से राय लेना जरूरी नहीं है. इस फैसले को अपराध नियंत्रण प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

मामला तब शुरू हुआ जब उपेंद्र यादव ने याचिका दायर की. उसके खिलाफ गंभीर अपराधों का लंबा रिकॉर्ड था. उसे गिरफ्तार किया गया और उसकी हिरासत बढ़ाई गई. उसने इसे गैरकानूनी बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी. लेकिन अदालत ने माना कि तथ्य उसके अपराधी चरित्र को साबित करते हैं. कोर्ट ने यह भी माना कि प्रशासन ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की.

अब यह फैसला आने के बाद राज्य सरकार के पास संगठित अपराध रोकने के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रिवेंटिव डिटेंशन मामलों में भविष्य का आधार बनेगा. प्रशासन इसे अपराध नियंत्रण के प्रभावी साधन के रूप में देख रहा है.

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