छठ पूजा से मिथिला लोक कला को मिली नई उड़ान.
बढ़ा पारंपरिक ‘सूप’ का बाजार
पटना/मधुबनी, बिहार: बिहार का पवित्र त्योहार छठ पूजा अब केवल आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि पारंपरिक मिथिला लोक कला के लिए एक नए बाजार को भी बढ़ावा दे रहा है। छठ पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाले बाँस के बने ‘सूप’ अब साधारण नहीं, बल्कि हाथों से बनाई गई रंग-बिरंगी मिथिला पेंटिंग से सजे हुए बाजार में पहुँच रहे हैं। इन कलात्मक सूपों की मांग देश और विदेश में तेजी से बढ़ रही है।
खासकर प्रवासी यानी दूसरे राज्यों और विदेशों में रहने वाले बिहार के लोग इस त्योहार के लिए विशेष रूप से इन हाथों से पेंट किए गए सूपों को खरीदने के लिए उत्साहित हैं। पारंपरिक रूप से केवल बाँस का सूप इस्तेमाल होता था, लेकिन अब कारीगर उन्हें मिथिला कला के विभिन्न रूपों, जैसे सूर्य देवता, छठी मैया और अन्य शुभ प्रतीकों से सजा रहे हैं। इस बढ़ती मांग ने मिथिला क्षेत्र के कलाकारों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार का एक नया साधन प्रदान किया है।
कलाकारों का कहना है कि पारंपरिक कला को त्योहार से जोड़ने से न केवल उनकी कला को मान्यता मिली है, बल्कि उनकी आय में भी काफी वृद्धि हुई है। यह नया रुझान स्थानीय हस्तशिल्प को एक वैश्विक पहचान दे रहा है और यह सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक उदाहरण भी है। छठ पूजा के माध्यम से मिथिला की लोक कला अब दुनिया के कोने-कोने तक पहुँच रही है।
