जलवायु परिवर्तन की चपेट में हिमाचल.
भविष्य के लिए खतरे की घंटी
शिमला: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की मानव विकास रिपोर्ट 2025 ने हिमाचल प्रदेश में बढ़ते जलवायु परिवर्तन के खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में तापमान में लगातार वृद्धि, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, अनियमित वर्षा और इसके परिणामस्वरूप होने वाले गंभीर आर्थिक नुकसान भविष्य के लिए एक बड़ी खतरे की घंटी हैं। यह रिपोर्ट न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए भी तत्काल कार्रवाई की मांग करती है।
UNDP की रिपोर्ट में विशेष रूप से बताया गया है कि बढ़ते तापमान से बागवानी और कृषि पर नकारात्मक असर पड़ रहा है, जो हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अनियमित वर्षा पैटर्न के कारण कहीं सूखा तो कहीं अचानक बादल फटने जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, ग्लेशियरों का पिघलना नदियों के जलस्तर को प्रभावित कर रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट पैदा होने की आशंका है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि उत्सर्जन में कमी नहीं लाई गई तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया गया है कि वह जलवायु अनुकूलन और शमन (Mitigation) रणनीतियों पर तुरंत ध्यान केंद्रित करे। इसमें हरित ऊर्जा स्रोतों पर जोर देना, जल संरक्षण तकनीकें अपनाना और पर्यटन को पर्यावरण-अनुकूल बनाना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। UNDP की यह रिपोर्ट राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को इस गंभीर पर्यावरणीय चुनौती से निपटने के लिए ठोस और समन्वित नीति बनाने हेतु प्रेरित करेगी।
