दिल्ली हाईकोर्ट ने बलवान खोखर की फरलो पर जवाब मांगा।

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों (Anti-Sikh Riots) के एक मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर की फरलो (Furlough) याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में अपना जवाब दाखिल करे। यह कानूनी प्रक्रिया दोषियों के मानवाधिकार और सजा के उद्देश्य के बीच संतुलन स्थापित करने के महत्व को दर्शाती है।

बलवान खोखर, जो कांग्रेस के पूर्व पार्षद रह चुके हैं, इस मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद से जेल में सजा काट रहे हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कुछ समय के लिए रिहाई की मांग की है, जिसे फरलो कहा जाता है, जो अच्छे आचरण वाले कैदियों को दिया जाने वाला एक कानूनी अधिकार है। यह मामला देश के सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक आपराधिक मामलों में से एक से जुड़ा हुआ है।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है। इस दौरान, केंद्र सरकार को अपना पक्ष और इस तरह के गंभीर अपराधों के दोषियों को फरलो देने के संबंध में मौजूदा नियमों को कोर्ट के सामने रखना होगा। पीड़ितों के परिवार और कानूनी विशेषज्ञ दोनों ही कोर्ट के इस अहम फैसले पर करीबी से नजर रख रहे हैं।

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