निजी अस्पतालों में बढ़ती लापरवाही पर प्रशासन को लेना होगा सबक

शीलू कुमारी की मौत ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाया

धनबाद : सावित्री हॉस्पिटल की घटना एक गंभीर चेतावनी है। यह बताती है कि निजी अस्पतालों में निगरानी की कितनी कमी है। परिजनों का गुस्सा सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि प्रशासनिक असफलता का परिणाम है।
शीलू कुमारी की मौत प्रसव के बाद हुई। यदि समय पर इलाज और विशेषज्ञ देखरेख होती, तो शायद जान बचाई जा सकती थी। परिजन अस्पताल की लापरवाही का हवाला दे रहे हैं।
राज्य में स्वास्थ्य निगरानी तंत्र कमजोर है। ऐसे में निजी संस्थान मनमानी कर रहे हैं। पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है लेकिन असली सुधार तब होगा जब जवाबदेही तय होगी।
सरकार को इस मामले को उदाहरण बनाकर कड़े कदम उठाने चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को पारदर्शिता लाने के लिए विशेष जांच समिति गठित करनी चाहिए। जनता अब ठोस सुधार की उम्मीद कर रही है।

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