पत्थर खनन पट्टा रद्द, हाईकोर्ट ने याचिका ठुकराई.
रॉयल्टी भुगतान न करने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया.
झारखंड हाईकोर्ट ने पत्थर खनन से जुड़े विवाद में फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि रॉयल्टी भुगतान जरूरी है। मामला पलामू जिले के चपरवार मौजा का है। वर्ष 2014 में खनन पट्टा दिया गया था। सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद थीं। इसके बावजूद रॉयल्टी का भुगतान नहीं हुआ। अदालत ने इसे गंभीर उल्लंघन माना। सरकारी कार्रवाई को सही ठहराया गया। याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिली।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि तीन वर्षों तक भुगतान नहीं हुआ। जिला खनन पदाधिकारी ने नोटिस जारी किया था। नोटिस के बाद भी बकाया राशि जमा नहीं हुई। इसके बाद उपायुक्त ने पट्टा रद्द किया। इसकी सूचना फरवरी 2020 में दी गई। याचिकाकर्ता ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए। राज्य ने नियमों का हवाला दिया। अदालत ने नियमों को प्राथमिकता दी। खान आयुक्त के आदेश को सही माना गया। सरकार का निर्णय वैध ठहराया गया।
खंडपीठ ने कहा कि मामले को वापस भेजना औपचारिकता होगी। बकाया तथ्य निर्विवाद है। प्राकृतिक न्याय का सहारा नहीं लिया जा सकता। याचिका को निराधार बताया गया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। यह फैसला खनन नियमों की सख्ती दर्शाता है। भविष्य में उल्लंघन पर कार्रवाई तय है। खनन पट्टाधारकों के लिए स्पष्ट संदेश दिया गया है। नियमों का पालन अनिवार्य बताया गया। अदालत का रुख सख्त रहा।
