बुंदेलखंड के सूर्य मंदिरों का रहस्य: चंदेल, प्रतिहार या कलचुरी?

सागर, मध्य प्रदेश: बुंदेलखंड के शानदार सूर्य मंदिरों का निर्माण किसने कराया थाचंदेलों, प्रतिहारों या कलचुरियों ने? यह सवाल सदियों से इतिहासकारों के बीच बहस का विषय रहा हैहालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि इस क्षेत्र में तीनों राजवंशों ने अलगअलग समय पर शासन किया और सभी ने सूर्य मंदिरों के निर्माण में योगदान दिया


खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिरों को विश्वसनीय रूप से चंदेलों से जोड़ा जाता है, लेकिन बुंदेलखंड में कई अन्य प्राचीन सूर्य मंदिरों के निर्माण को लेकर स्पष्टता की कमी हैविशेषज्ञों का कहना है कि इन मंदिरों की स्थापत्य शैली, कलाकृति और शिलालेखों के गहन अध्ययन के बाद ही निश्चित रूप से कुछ कहा जा सकता हैस्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सागर जिले में रहिल सागर का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर चंदेल कालीन माना जाता है


सागर के रहिल में सुनार और देहार नदियों के संगम पर स्थित यह सूर्य मंदिर अपनी अद्वितीय विशेषताओं के कारण खास हैयह भारत का एकमात्र सूर्य मंदिर है जो पूर्वाभिमुख होने के साथसाथ कर्क रेखा पर भी स्थित हैइसकी निर्माण कला 10वीं शताब्दी की चंदेल वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैइसकी ऐतिहासिक और भूगोलिक महत्ता के चलते इसकी संरक्षण की अत्यधिक आवश्यकता है


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