मध्य प्रदेश से नई चपाती गेहूं किस्में लाएंगी स्वाद.

पोषण और मुनाफा
इंदौर, मध्य प्रदेश: जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru Agricultural University) और इंदौर स्थित गेहूं अनुसंधान केंद्र (Wheat Research Centre) के वैज्ञानिकों ने गेहूं की खेती को पुनर्परिभाषित करते हुए नई चपाती-विशिष्ट किस्में (Chapati-specific varieties) विकसित की हैं। यह नवाचार मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शरबती गेहूं से एक कदम आगे है, और इसका लक्ष्य बेहतर स्वाद, उच्च पोषण मूल्य और किसानों के लिए अधिक मुनाफा सुनिश्चित करना है।

वैज्ञानिकों ने ये नई किस्में विशेष रूप से प्रीमियम गुणवत्ता वाली रोटियाँ (चपातियाँ) बनाने के लिए तैयार की हैं। इन नई किस्मों में पोषण तत्वों की मात्रा अधिक है, जिससे ये स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभदायक हैं। इसके अलावा, इनकी उत्पादकता (Productivity) भी पारंपरिक शरबती किस्मों की तुलना में अधिक होने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। अनुसंधान दल ने वर्षों के शोध और परीक्षण के बाद इन किस्मों को स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल बनाया है, जिससे किसानों को कम जोखिम पर उच्च उपज मिल सके। कृषि समुदाय में इन नई किस्मों को लेकर बड़ा उत्साह है।

राज्य सरकार और कृषि विभाग इन नई गेहूं किस्मों को किसानों तक पहुँचाने के लिए प्रचार और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहे हैं। यह पहल मध्य प्रदेश को गेहूं उत्पादन और खाद्य गुणवत्ता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करेगी।

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