सुप्रीम कोर्ट: प्रक्रियात्मक उल्लंघन पर मौत की सजा चुनौती योग्य।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को दी गई मौत की सजा में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन हुआ है, तो उसे अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। यह फैसला दोषियों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने यह टिप्पणी वसंत संपत दुपरे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। दुपरे ने अपनी मौत की सजा को चुनौती दी थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और इसमें प्रक्रियात्मक निष्पक्षता भी शामिल है। अगर इन प्रक्रियाओं का उल्लंघन होता है, तो यह मौत की सजा को अवैध बना सकता है।

इस फैसले से उन दोषियों को एक नई उम्मीद मिली है, जिनकी मौत की सजा के मामलों में कानूनी प्रक्रिया में खामियां रही हैं। यह फैसला यह भी दिखाता है कि न्यायपालिका किस तरह से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।


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