सीआईएमएफआर वैज्ञानिकों ने नवी मुंबई हवाईअड्डा निर्माण की बाधाएं पार की.
नई दिल्ली: नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (Navi Mumbai International Airport) का निर्माण इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक नवाचार का एक शानदार उदाहरण है, जिसने चुनौतीपूर्ण भूभाग पर विजय प्राप्त की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में धनबाद स्थित केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (CIMFR) के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 92 मीटर ऊँची उलवे पहाड़ी (Ulwe Hill) को समतल करने और उलवे नदी (Ulwe River) के मार्ग को परिवर्तित करने जैसे विशाल कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
सीआईएमएफआर के वैज्ञानिकों ने पहाड़ी को समतल करने के लिए नियंत्रित विस्फोट (Controlled Blasting) की एक अद्वितीय और सुरक्षित तकनीक प्रदान की। यह तकनीक इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि विस्फोट की कंपन से आसपास के रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए था। वैज्ञानिकों ने विस्फोट के पैरामीटर्स को बारीकी से निर्धारित किया, जिससे पहाड़ी के समतलीकरण का कार्य सुरक्षित और तेज गति से पूरा हो सका। इस पहाड़ी की मिट्टी का उपयोग जलाशय और दलदली भूमि को भरने तथा हवाई अड्डे के लिए आवश्यक भूमि तैयार करने में किया गया। विशेषज्ञों की सहायता से उलवे नदी को भी उसके मूल मार्ग से लगभग एक किलोमीटर तक मोड़कर एक नया चैनल बनाया गया, जो परियोजना की एक और बड़ी बाधा थी।
सीआईएमएफआर के निदेशक ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह वैज्ञानिक और तकनीकी कौशल का प्रमाण है। यह हवाई अड्डा न केवल मुंबई की बढ़ती हवाई यातायात की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भारतीय वैज्ञानिकों की योग्यता को भी विश्व पटल पर स्थापित करेगा। इस परियोजना में वैज्ञानिकों की भागीदारी ने बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में स्वदेशी अनुसंधान और विकास के महत्व को रेखांकित किया है।
