थानों के पूछताछ रूम में CCTV क्यों नहीं?
नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने राजस्थान सरकार को एक कड़ा सवाल किया है कि पुलिस थानों के पूछताछ कक्षाें (Interrogation Rooms) में CCTV कैमरे क्यों नहीं लगाए गए हैं। न्यायमूर्ति की पीठ ने टिप्पणी की कि पुलिस स्टेशन का पूछताछ कक्ष ही वह “मुख्य स्थान” है, जहाँ CCTV कैमरे लगाए जाने चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो। अदालत ने यह सख्त रुख एक याचिका की सुनवाई के दौरान अपनाया, जिसमें पुलिस हिरासत में उत्पीड़न के आरोपों पर चिंता व्यक्त की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले एक फैसले में सभी राज्यों को पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने का आदेश दिया था, जिसमें पूछताछ कक्षों को भी शामिल किया गया था। हालांकि, पीठ ने पाया कि राजस्थान में इस आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है, विशेषकर पूछताछ वाले क्षेत्रों में। न्यायालय ने जोर देते हुए कहा कि कैमरे लगाने का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार न हो। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
अदालत का यह सवाल पुलिस थानों में जवाबदेही (Accountability) और पारदर्शिता (Transparency) बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। पीठ ने स्पष्ट किया कि CCTV फुटेज हिरासत में हुई मौतों और उत्पीड़न के मामलों में एक अहम सबूत के रूप में कार्य कर सकती है। यह पुलिस को उनकी सीमाओं में रहने के लिए भी बाध्य करेगा। अब राजस्थान सरकार को CCTV कैमरों की स्थापना को लेकर अपनी योजना और अब तक की प्रगति का विवरण अदालत को देना होगा।
