राज्य में हजारों चापाकल खराब, पेयजल संकट से लोग परेशान.
विधानसभा में उठा मुद्दा, ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत.
झारखंड में गर्मी बढ़ते ही पेयजल संकट सामने आने लगा है। कई ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता कम हो गई है। इस विषय पर विधानसभा के बजट सत्र में चिंता व्यक्त की गई थी। विधायकों ने पंचायत स्तर पर चापाकल लगाने की मांग की थी। लेकिन योजनाओं के अधूरे रहने से समस्या बनी हुई है। नल-जल योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। कई गांवों में पाइपलाइन अधूरी पड़ी है। लोगों को वैकल्पिक जल स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं। जल संकट धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रहा है। प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग बढ़ रही है।
विभागीय आंकड़ों ने स्थिति को चिंताजनक बताया है। राज्य में बड़ी संख्या में चापाकल खराब पड़े हैं। मरम्मत कार्य समय पर नहीं होने से परेशानी बढ़ी है। ग्रामीणों को पानी लाने में अतिरिक्त समय लग रहा है। कई क्षेत्रों में जल स्तर भी कम हुआ है। स्थानीय लोगों ने समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठ रही है। अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा करने की बात कही है। गर्मी के चरम पर संकट और बढ़ने की आशंका है। समाधान के लिए ठोस योजना जरूरी मानी जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार राज्य में 2,79,618 चापाकल स्थापित हैं। इनमें से 1,99,842 चालू हैं। करीब 79,669 चापाकल खराब स्थिति में हैं। यानी लगभग 25 प्रतिशत चापाकल बंद पड़े हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों ने नियमित निरीक्षण की आवश्यकता बताई है। जल योजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया है। सरकार से विशेष मरम्मत अभियान शुरू करने की मांग हुई है। लोगों को राहत देने के लिए त्वरित कदम जरूरी बताए गए हैं। पेयजल संकट राज्य की बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन गया है।
