संविदा ड्राइवरों के स्थायीकरण पर हाईकोर्ट की राहत.

काम और मानदेय जारी रखने का आदेश, सरकार से जवाब तलब.
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट में संविदा पर कार्यरत तीन ड्राइवरों को अंतरिम राहत दी है। यह मामला दुमका और साहिबगंज डिवीजन के अधिकारियों के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मियों से जुड़ा है। इन कर्मचारियों ने अपनी सेवाओं को स्थायी करने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को उनके मौजूदा कार्यस्थल पर काम करने दिया जाए। अदालत ने उनके मासिक मानदेय का भुगतान भी जारी रखने को कहा है। इसके साथ ही राज्य सरकार से मामले में जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की गई है। याचिका दाखिल करने वालों में चंद्रशेखर भंडारी, सुरेश कुर्मानी और भूषण पासवान शामिल हैं। तीनों कर्मचारी विभाग में ड्राइवर के पद पर काम कर रहे हैं। वे सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के कार्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे दस वर्ष से अधिक समय से संविदा पर कार्यरत हैं। इसके बावजूद अब तक उनकी सेवाओं को नियमित नहीं किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने स्थायीकरण की मांग की है। अदालत ने फिलहाल उनकी नौकरी और भुगतान जारी रखने के पक्ष में अंतरिम आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह और अधिवक्ता राजलक्ष्मी शर्मा ने पक्ष रखा। वकीलों ने अदालत को बताया कि तीनों कर्मचारी लंबे समय से विभागीय जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दस साल से अधिक सेवा देने के बाद भी नियमितीकरण नहीं होना उनके लिए चिंता का विषय है। इस आधार पर अदालत से उनकी सेवाओं को स्थायी करने का आग्रह किया गया। अदालत ने मामले में राज्य सरकार का पक्ष जानना जरूरी समझा। इसलिए सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया। फिलहाल कर्मचारियों को काम से हटाने के बजाय सेवा जारी रखने की व्यवस्था दी गई है। उनके मासिक मानदेय का भुगतान भी जारी रहेगा। हालांकि, इस अंतरिम राहत को स्थायीकरण पर अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। नियमितीकरण से संबंधित मुख्य मांग अभी अदालत में विचाराधीन है। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित है। उस दौरान सरकार के जवाब पर विचार किया जाएगा। आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्थायीकरण की मांग पर स्थिति स्पष्ट होगी। तब तक तीनों कर्मचारियों को अदालत के अंतरिम आदेश से राहत मिली रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *