बोकारो स्टील प्लांट के गेट खुलने पर हाईकोर्ट को राहत.

डीसी और एसपी को शपथपत्र देने का निर्देश, 28 अक्टूबर को अगली सुनवाई.

बोकारो स्टील प्लांट के सभी 11 गेट बंद होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने कर्मचारियों और जरूरी सामानों की आवाजाही बाधित होने की शिकायत करते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। पूजा अवकाश के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर विशेष पीठ का गठन किया गया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में दोपहर 2:15 बजे सुनवाई हुई। सेल की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कंपनी का पक्ष रखा। अधिवक्ता बिभाष सिन्हा और ऋषव राज भी कंपनी की ओर से उपस्थित रहे। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने दलीलें पेश कीं। बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा भी ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हुए। उपायुक्त ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने आंदोलनकारियों को हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि प्लांट के सभी गेट खोल दिए गए हैं और कर्मचारियों की आवाजाही सामान्य हो गई है। सेल के वकील ने कंपनी से जानकारी लेकर शेष दस गेट खुलने की पुष्टि की। इसके बाद अदालत ने प्रशासन के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में कर्मचारियों के आने-जाने और प्लांट के संचालन में रुकावट नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही। अदालत ने इस आश्वासन के आधार पर फिलहाल गृह सचिव को तलब नहीं किया। हालांकि, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अगली सुनवाई से पहले शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया। अब मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी।

सेल ने याचिका में दावा किया कि 16 अक्टूबर की सुबह से प्लांट के सभी गेटों पर अवरोध उत्पन्न कर दिया गया था। इसके कारण लगभग 3500 कर्मचारी और श्रमिक परिसर के अंदर फंस गए थे। कंपनी के अनुसार, इस स्थिति से कर्मचारियों की शिफ्ट बदलने और नियमित कार्यों में परेशानी होने लगी थी। याचिका में भोजन, पानी और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी कठिनाइयों का उल्लेख किया गया। सेल ने बताया कि बोकारो स्टील प्लांट में उत्पादन की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। ब्लास्ट फर्नेस, पिघले हुए लोहे, उच्च दबाव वाली पाइपलाइन और गैस प्रणालियों का संचालन विशेष सावधानी की मांग करता है। ऐसे में कर्मचारियों और रखरखाव दल की आवाजाही बाधित होने से औद्योगिक दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है। कंपनी ने आशंका जताई कि संयंत्र अचानक बंद होने पर करीब 12 हजार टन पिघला हुआ स्टील ब्लास्ट फर्नेस में जम सकता है। इससे बड़े आर्थिक नुकसान के साथ पर्यावरण और मानव जीवन के लिए भी जोखिम उत्पन्न हो सकता है। सेल ने गेटों पर अवरोध के लिए बोकारो की विधायक श्वेता सिंह और विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलनकारियों पर आरोप लगाया। इस गतिरोध के बाद कंपनी ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। सुनवाई में उपायुक्त ने कहा कि वह स्थिति नियंत्रित करने में सक्षम हैं और किसी उच्च अधिकारी को बुलाने की जरूरत नहीं है। अदालत ने फिलहाल विधायक और संघ को नोटिस जारी नहीं किया।

सुनवाई के दौरान विस्थापितों की नियुक्ति से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के दो आदेशों का भी उल्लेख हुआ। पांच मार्च 2008 के आदेश में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 970 लोगों के नामों पर अन्य शर्तें समान होने पर नियुक्ति के लिए विचार करने और प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि इससे नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं बनता। 27 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित आवेदन खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि मामले को समाप्त किया जाना चाहिए और पहले से लंबित नहीं रही सिविल अपील में ऐसे आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता। सेल ने इन आदेशों का हवाला देते हुए मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि सामने रखी। हाईकोर्ट ने फिलहाल प्लांट में सामान्य कामकाज बनाए रखने के प्रशासनिक आश्वासन को दर्ज किया। अगली सुनवाई में उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के शपथपत्रों के आधार पर स्थिति की समीक्षा होगी।

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