कैंसर की दवाएं 70% तक सस्ती होंगी.
झारखंड में नई दरों की निगरानी करेंगे ड्रग इंस्पेक्टर.
Ranchi News: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतें घटाने का फैसला मरीजों के लिए राहत लेकर आया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं की कीमतों में 70 प्रतिशत तक कटौती का आदेश जारी किया है। शनिवार को जारी निर्देश के अनुसार, नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी। इससे झारखंड के उन मरीजों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें इलाज के लिए लंबे समय तक दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। कैंसर के उपचार में दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के बजट पर भारी पड़ता है। कीमतों में कमी से इस बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है। नई दरें लागू होने के बाद दवा कंपनियों, अस्पतालों और खुदरा विक्रेताओं को निर्धारित मूल्य का पालन करना होगा। झारखंड में ड्रग इंस्पेक्टर दवाओं की बिक्री की जांच करेंगे। अधिकारियों का प्रयास रहेगा कि मरीजों से तय कीमत से अधिक राशि नहीं ली जाए। दवा निर्माताओं को आदेश जारी होने के सात दिनों के भीतर संशोधित कीमतों का विवरण एनपीपीए को देना होगा। कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर नई मूल्य सूची प्रकाशित करनी होगी। अस्पतालों और दवा विक्रेताओं को भी बदली हुई दरों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इस फैसले का उद्देश्य कैंसर की दवाओं की बिक्री में अधिक व्यापारिक मार्जिन पर नियंत्रण करना है। औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के तहत अधिकतम खुदरा मूल्य पर व्यापारिक मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रावधान है। कीमतों की समीक्षा के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। इसमें कैंसर विशेषज्ञों, चिकित्सा विशेषज्ञों, अस्पताल प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को शामिल किया गया था। समिति ने 137 दवाओं की कीमतें कम करने की सिफारिश की थी। उसने दवाओं के मूल्य की नियमित समीक्षा करने का सुझाव भी दिया। इससे पहले एनपीपीए ने 2019 में कैंसर की 42 दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया था। हालांकि, उस समय कुछ कंपनियों द्वारा ब्रांड नाम बदलकर अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे में नई दरों की निगरानी और उनका सही तरीके से लागू होना महत्वपूर्ण होगा। झारखंड में अस्पतालों और दवा दुकानों की बिक्री व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। मरीजों को वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब दवाएं नई कीमतों पर उपलब्ध होंगी। निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी होगी।
