गुरुचरण नायक के बॉडीगार्ड हमले में आरोपी को राहत.
अप्रूवर की गवाही और हिरासत अवधि बनी जमानत का आधार.
झारखंड हाईकोर्ट ने कुलदीप गंझू को जमानत देने का आदेश दिया है। वह मनोहरपुर के पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के बॉडीगार्डों पर हुए हमले के मामले में आरोपी हैं। बाद में वह इस केस में सरकारी गवाह बन गए थे। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति राम शर्मा की खंडपीठ ने उनकी याचिका स्वीकार की। अदालत ने एनआईए कोर्ट के 12 फरवरी 2026 के आदेश को रद्द कर दिया।
यह मामला झिलरुआ गांव में हुए हमले से संबंधित है। वहां प्लस-2 स्कूल के स्थापना दिवस पर खेल आयोजन किया गया था। गुरुचरण नायक इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। वह अपने बॉडीगार्डों और ड्राइवर के साथ स्कॉर्पियो से वहां पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद शाम करीब 5:45 बजे उनका काफिला लौट रहा था। इसी दौरान नक्सलियों ने बॉडीगार्डों को घेर लिया। हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला किया।
इस वारदात में दो बॉडीगार्डों की मौत हो गई थी। घटना के बाद गोइलकेरा थाने में कांड संख्या 01/2022 दर्ज किया गया। शुरुआती चार्जशीट नौ आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई थी। बाद में केंद्र सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौंप दी। एजेंसी ने इसे RC-03/2022/NIA/RNC के रूप में दर्ज किया।
जांच के दौरान कुलदीप गंझू ने सीआरपीसी की धारा 306 के तहत सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन दिया था। उनकी अर्जी 27 जून 2023 को मंजूर कर ली गई थी। वह 9 जनवरी 2023 से हिरासत में हैं। ट्रायल कोर्ट में उनकी गवाही पीडब्ल्यू-19 के रूप में दर्ज हो चुकी है। जमानत याचिका पर एनआईए के विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि कुलदीप अपने पुराने बयान से पीछे नहीं हटे हैं। अपील दाखिल करने में हुई 52 दिन की देरी भी हाईकोर्ट ने माफ कर दी। अदालत ने उनकी गवाही, सरकारी गवाह बनने की स्थिति और हिरासत की अवधि पर विचार किया। इसके बाद खंडपीठ ने जमानत मंजूर कर दी। उन्हें 10 हजार रुपये का निजी मुचलका देना होगा। साथ ही 10 हजार रुपये की राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने होंगे। जमानत की प्रक्रिया एनआईए के विशेष न्यायाधीश (एजेसी-XVI), रांची की संतुष्टि के अनुसार पूरी की जाएगी।
