शिक्षादूतों की हत्या से 2026 तक नक्सलवाद समाप्ति पर सवाल.

रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में ‘शिक्षादूतों’ की हालिया हत्याओं ने राज्य सरकार के इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। सरकार और सुरक्षा अधिकारियों के बार-बार के दावों के बावजूद, ये हत्याएँ दिखाती हैं कि नक्सलवाद अभी भी इस क्षेत्र में एक गंभीर खतरा बना हुआ है।

विशेषज्ञ और पर्यवेक्षक इस सरकारी दावे को चुनौती देते हैं। उनका मानना ​​है कि नक्सलवाद एक जटिल समस्या है, जिसे केवल एक समय सीमा में हल नहीं किया जा सकता है। ‘शिक्षादूत’, जो सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुँचाने का काम करते हैं, नक्सलियों के मुख्य निशाने पर होते हैं। इन हत्याओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

यह घटना यह साबित करती है कि नक्सलवाद को खत्म करने के लिए केवल सैन्य अभियान ही काफी नहीं हैं। इसके लिए सामाजिक-आर्थिक विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बेहतर बनाना होगा। जब तक इन मुद्दों को संबोधित नहीं किया जाता, तब तक ‘नक्सलवाद मुक्त’ छत्तीसगढ़ का सपना अधूरा रहेगा।

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