सुप्रीम कोर्ट ने बांध याचिका पर केंद्र राज्यों को नोटिस दिया

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने ब्रिटिश काल के मुल्लापेरियार बांध को बदलकर एक नया बांध बनाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, तमिलनाडु और केरल सरकारों को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि पुराने बांध के करीब एक करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिसके कारण किसी भी अनहोनी की स्थिति में बड़ी जनहानि का खतरा बना हुआ है। इस याचिका में बांध की संरचनात्मक सुरक्षा और लाखों लोगों के जीवन के अधिकार पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।

याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में कहा है कि 120 साल से अधिक पुराना यह गुरुत्व बांध पहले ही अपनी तय उम्र पूरी कर चुका है, और भूकंप या अत्यधिक वर्षा की स्थिति में इसके टूटने का खतरा हमेशा बना रहता है। मुल्लापेरियार बांध जल विवाद केरल और तमिलनाडु के बीच दशकों से एक बड़ा मुद्दा रहा है, जहां केरल नए बांध का निर्माण चाहता है, जबकि तमिलनाडु मौजूदा बांध की मरम्मत और उसकी जल भंडारण क्षमता को बढ़ाने पर जोर देता है। सुप्रीम कोर्ट का यह नोटिस दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम हो सकता है।

अदालत ने नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की है। याचिकाकर्ता का दावा है कि मुल्लापेरियार बांध के नीचे रहने वाले 10 मिलियन लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। सुरक्षा और जल आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट की यह कार्यवाही दशकों पुराने इस विवाद पर अंतिम निर्णय की ओर बढ़ने का संकेत देती है।

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